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पीली खिड़की

13+
Horror

पीली खिड़की

पहाड़ के गाँव में बिजली गई, पर एक खिड़की जलती रही। लाइनमैन जानता है कि इसका क्या मतलब है, और वह खिड़की उसकी अपनी है।

13+ 4 min read हिन्दी 4 chapters AI-assisted fiction

पाली गाँव का लाइनमैन देव सिंह एक नियम जानता है, जो उसने अपने पिता से सीखा था। जब बिजली चली जाए और किसी घर का बल्ब फिर भी जलता रहे, तो उस घर में सोया आदमी पौ फटने तक सोता रहा तो कभी नहीं उठेगा। आज रात बिजली जाती है, और जलती हुई खिड़की उसके अपने घर की है। रास्ता पहाड़ खिसकने से बंद है, फ़ोन में नेटवर्क नहीं है, और उसके हाथ में सिर्फ़ एक लाल लीवर है।

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बिना बिजली का बल्ब

देव सिंह नेगी पंद्रह साल से पाली गाँव का लाइनमैन है, और इन पंद्रह सालों में उसने एक बात किसी को नहीं बताई।

पाली में चालीस घर हैं, और पहाड़ की बिजली हर रात किसी न किसी वक़्त चली जाती है। जब जाती है, तो देव सिंह पहाड़ी की चोटी पर बनी सब-स्टेशन की कोठरी से नीचे गाँव को देखता है। चालीस घर, चालीस अँधेरी खिड़कियाँ। और कभी-कभी चालीस में से एक खिड़की में पीली रोशनी जलती रहती है। बिना बिजली के।

यह उसने अपने पिताजी से सीखा था, जो उससे पहले यही नौकरी करते थे। नियम सीधा है। जिस घर का बल्ब बिना बिजली जल रहा हो, उस घर में जो सोया है, वह पौ फटने तक सोता रहा तो सुबह नहीं उठेगा। पौ फटते ही बल्ब बुझ जाता है। उससे पहले सोने वाले को जगाए रखना पड़ता है।

पहली बार जब पिताजी ने उसे यह दिखाया, तब वह बाईस साल का था। उसने हँसकर कहा था कि पुराना बल्ब है, फ़िलामेंट गरम रह गया होगा। पिताजी ने कुछ नहीं कहा। सुबह उस घर का बूढ़ा किसान जागा, और देव सिंह फिर कभी नहीं हँसा।

इसलिए देव सिंह नीचे उतरता है और किवाड़ खटखटाता है। “लाइन में फ़ॉल्ट है, मीटर देखना है।” फिर चाय माँगता है, बातें करता है, और सुबह तक बैठा रहता है। गाँव कहता है, नेगी जी बड़े मेहनती हैं।

पिछले साल वह ऐसी तीन रातें बैठा। तीनों बार सुबह वही आदमी बहस करता हुआ उठा, जिसे वह जगाए रखता था।

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Chapters

  1. 1बिना बिजली का बल्ब
  2. 2आज की रात
  3. 3रात भर
  4. 4शिकायत