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तीन सीटी

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Horror

तीन सीटी

मीना की नई ससुराल का कुकर चूल्हे के बिना सीटी देता है, और हर बार तब, जब कोई झूठ बोलता है।

16+ 5 min read हिन्दी 4 chapters AI-assisted fiction

शादी के तीसरे हफ़्ते मीना देखती है कि कानपुर के इस पुराने घर का ठंडा कुकर बिना गैस के सीटी देता है, ठीक तब जब कोई झूठ बोलता है। पति की छिपी बात तो खुल जाती है। फिर मीना अम्मा से बाबूजी के बारे में पूछती है, जो बीस साल पहले तीर्थ पर गए थे और कभी नहीं लौटे। कुकर की सीटी उस जवाब पर भी बजती है। और रसोई के फ़र्श पर एक टाइल बाक़ियों जैसी नहीं है।

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ठंडा कुकर

शादी के तीसरे हफ़्ते मीना को पता चल गया कि इस घर का कुकर झूठ पकड़ लेता है।

कानपुर के स्वरूप नगर में राजेश का पुराना घर था, और उसकी रसोई में एक काला, पिचका हुआ कुकर रहता था। रोज़ शाम वह दाल बनाता, तीन सीटी देता और चुप हो जाता। मीना को वह बस एक पुराना बर्तन लगता था।

उस रात गैस बंद थी। कुकर ठंडा, ख़ाली, ऊपर की शेल्फ़ पर रखा था। मीना पानी पीने रसोई में आई, तभी राजेश दरवाज़े पर आकर बोला, “मैंने दफ़्तर में ही खा लिया था, तुम खा लो।”

शेल्फ़ पर रखे ठंडे कुकर ने सीटी दी।

एक लंबी, तीखी सीटी। जैसे किसी ने गरम भाप छोड़ी हो। पर चूल्हा बुझा था।

राजेश के चेहरे का रंग उड़ गया। “पुराना है,” वह जल्दी से बोला। “अपने आप बज जाता है। तुम सो जाओ।”

मीना ने राजेश की आँखों में देखा। वह अपनी चप्पल को घूर रहा था, जैसे कोई बच्चा जिसकी चोरी पकड़ी गई हो। मीना ने कुछ नहीं कहा और अपने कमरे में चली गई।

मीना पूरी रात जागती रही। सुबह उसे पता चला कि राजेश ने कुछ नहीं खाया था। उसकी नौकरी तीन दिन पहले छूट गई थी, और वह रोज़ दफ़्तर के बहाने पार्क में बैठा रहता था।

फिर भी एक बात उसे चैन नहीं लेने दे रही थी। कुकर को कैसे पता चला?

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Chapters

  1. 1ठंडा कुकर
  2. 2अम्मा की बात
  3. 3नई टाइल
  4. 4सीटी